वाराणसी। शहर में चर्चा में चल रहा अधिवक्ता पर जानलेवा हमले का मामला बृहस्पतिवार को कोर्ट में उस वक्त और गरमा गया, जब आरोपी आयुष सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। माहौल इतना तनावपूर्ण था कि कोर्टरूम एक पल को अखाड़ा जैसा दिखने लगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने जोरदार बहस की, लेकिन आखिर में फैसला आरोपी के खिलाफ गया।
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विनोद कुमार ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्य, FIR की धाराएँ और मेडिकल चोटों की गंभीरता को देखते हुए आरोपी आयुष सिंह की जमानत याचिका ठुकरा दी।
आदेश में साफ लिखा – “जमानत प्रार्थना पत्र संख्या 4345/2025 खारिज किया जाता है।”
कोर्ट में क्या हुआ? जब वकीलों की लामबंदी ने बढ़ाया तापमान…
वादी की तरफ से इतने वकील कोर्ट में मौजूद थे कि पूरी गैलरी भर गई। वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता श्रीनाथ मिश्रा (हाई कोर्ट इलाहाबाद), वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह, अशोक सिंह प्रिंस, मंगलेश दूबे, योगेश उपाध्याय, सुनील मिश्रा, आशुतोष दुबे, मनीष पाण्डेय, विजय पाण्डेय, श्रेयांश जायसवाल, तुषार उपाध्याय, शुभेंदु पाण्डेय, आकाश गौतम समेत दर्जनों वकील जमानत के विरोध में खड़े हो गए।
सुनवाई के दौरान हर तर्क पर विपक्ष से तुरंत जोरदार जवाब आता रहा। कोर्ट में माहौल कहीं-कहीं इतना गरम हुआ कि जज को बीच में हस्तक्षेप कर शांत करना पड़ा l
घटना की हकीकत – FIR के पन्नों में दर्ज हर लाइन दहशत की कहानी
दस्तावेज़ के पेज 5 में दर्ज FIR के मुताबिक… रात लगभग 10 बजे अधिवक्ता सर्वेश चौबे अपने दोस्त सूरज के साथ नरिया गेट के पास चाय पी रहे थे। तभी दुकान पर चाय के पैसे को लेकर विवाद हुआ और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया।
अनन्त सिंह, अर्चित, सौरभ और 3-4 अन्य युवकों ने चाय वाले को गालियां देते हुए पीटना शुरू कर दिया।
जब अधिवक्ता ने बीच-बचाव किया तो हमलावर उलटे उनके ही पीछे पड़ गए।
कैसे हुआ हमला – FIR की भाषा में पढ़िए झकझोर देने वाला वर्णन:
• हमलावरों ने पहले गाली-गलौज की
• फिर अधिवक्ता पर रॉड और ईंट से ताबड़तोड़ हमला किया
• सर्वेश चौबे का सिर फट गया, वह मौके पर बेहोश हो गए
• सूरज को भी सिर पर गंभीर चोटें आईं
• चिल्लाने पर भीड़ जुटी तो हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले
डायल 112 के जवान मौके पर पहुंचे और दोनों घायलों को BHU ट्रामा सेंटर पहुंचाया।
जांच में कैसे आया आयुष सिंह का नाम?
विवेचना के दौरान गवाहों के बयान, घटनास्थल की स्थितियाँ और CCTV के आधार पर आयुष सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया। यही गिरफ्तारी आदेश पेज 4 में साफ दर्ज है।
जमानत क्यों हुई रिजेक्ट? अदालत की 3 बड़ी वजहें
1. चोटें गंभीर थीं, हमला जानलेवा था
सिर फटने जैसी चोटें कोर्ट ने गंभीर मान लीं।
2. घटना में कई हमलावर शामिल
समूहिक हमला कोर्ट की नजर में गंभीर अपराध।
3. FIR की धाराएँ सीधे कोर्ट के रिकॉर्ड को प्रभावित कर रही थीं
BNS की धारा 191(2), 115(2), 351(3), 352, 109(1) के आधार पर मामला पहले से ही संवेदनशील था।
बचाव पक्ष की दलीलें नहीं चल पाईं
अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने बहस की और आरोपी को फंसाया गया बताया, लेकिन वादी पक्ष के वकीलों ने हर दलील को तुरंत काउंटर कर दिया। माहौल इतना गर्म था कि कोर्ट में सीटें कम पड़ गईं।
वकील समाज में नाराजगी – “ये सिर्फ हमला नहीं, पूरी विधि व्यवस्था को चुनौती है”
अधिवक्ताओं का कहना है कि वकील पर हमला असल में न्याय व्यवस्था पर हमला है। इस मामले को लेकर कोर्ट कंपाउंड में दिनभर चर्चा चली।
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BHARAT EXPRESS LIVE का निष्कर्ष
यह मामला अब सिर्फ एक FIR नहीं रहा, बल्कि वकील समाज में गुस्से की लहर पैदा कर चुका है। अदालत का कड़ा रुख साफ बताता है कि ऐसे अपराधों को लेकर उदारता नहीं दिखाई जाएगी।
आरोपी की जमानत खारिज – और अब केस का अगला चरण और भी दिलचस्प होने वाला है।
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वाराणसी में अधिवक्ता पर जानलेवा हमला… आरोपी की जमानत पर अदालत हुई सख्त!
Reviewed by 24×7 Bharat Express Live
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November 27, 2025
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